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“विचार” एक “जल” की तरह है

“विचार” एक “जल” की तरह

है,
आप उसमें “गंदगी” मिला दो तो
वह “नाला” बन जाऐगा,
अगर उसमें “सुगंध” मिला दो तो
वह “गंगाजल” बन जाऐगा !

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